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Critical Analysis of The Canterbury Tales in Hindi

Canterbury Tales

The Canterbury Tales एक Frame Narrative है जिसके कहानी में कहानी का वर्णन पाते हैं. इसे अंग्रेजी कविता के जनक कहे जाने वाले अंग्रेज साहित्यकार ज्यॉफ्री चौसर ने लिखा है. ज्यॉफ्री चौसर अग्रेजी राज्य के सभासद, विद्वान, यात्री, व्यापारी और कवि थे. माना जाता है कि वही ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अंग्रेजी भाषा को प्रसिद्द बनाया जो पहले साधारण लोगो के द्वारा बोली जाने वाली भाषा थी. इंग्लैंड में १४वीं शताब्दी में लैटिन, ग्रीक और फ़्रांसिसी भाषा में ही सरकारी काम-काज हुआ करता था.

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The Canterbury Tales को चौसर ने 1386 ई. में लिखना शुरू किया जिसे उन्होंने 1390 में पूरा किया. यह 24 कहानियों का संग्रह है और इसमें 17,000 पंक्तियाँ हैं. चौसर की यह कृति कविता के फॉर्म में लिखी गयी है; हालाँकि इसमें कुछ पात्र के द्वारा गद्य में कहानी कही गयी हैं.

इस कहानी में 30 हजयात्री हैं जिसमे इस कहानी के लेखक चौसर भी सम्मिलित है. सारे हजयात्री को 4 कहानियां कहने थे-दो धर्म-स्थल तक पहुँचने से पहले और दो वहां से लौटते समय. इस तरह से सभी को 30×4=120 कहानियां कहने थे किन्तु चौसर मात्र 24 कहानियों का ही संग्रह कर पाते हैं. इसलिए उनकी यह कृति अधूरी कृति है.

सारे हजयात्री को लन्दन के Tabard Inn में इकट्ठे होने हैं. यात्रा अप्रैल के शुरुआत महीने में करने हैं. यात्रा उस Inn (सराय) से प्रारंभ होकर Thomas-a-Becket के मजार पर ख़त्म होने हैं. Thomas-a-Becket कन्तेरबरी के बड़े पादरी थे जिन्होंने बड़े मकसद के लिए अपनी जान कि क़ुरबानी दे दी थी. लोग हर साल उनके मजार पर जाते थे.

चौसर ने कई सारे पात्र का परिचय अपनी इस कृति में करवाया है जिसमे पादरी, मजदूर, योद्धा, सन्यासिन, पेशेवर, पाखंडी इत्यादि हैं. ये सभी तत्कालीन समय के बारे में स्पष्ट रूप से बतलाते है. कई सारे पात्रों को अपनी इस कृति में जगह देने के कारण Dryden कहते हैं:

‘Here is God’s Plenty.’

उनके कहानी के एक पात्र The Prioress के बारे में वे बताते हैं कि वो हलांकि सन्यासिन है किन्तु दिखावा एक धनी महिला के रूप में करती है. चौसर ने इस पात्र के जरिये समाज में पाखण्ड को दर्शाया है. वे The Prioress के बारे में कहते हैं:

‘…peyned hire to countrefete chere

Of court, and to ben estatlich of manere,

And to ben holden digne of reverence.’

Chaucer the Parson को निम्न शब्दों में वर्णन करते हैं-

But rather wolde (the Parson) yeven, out of doute,

Unto his povre parisshens aboute

Of his offring, and eek of his substaunce.’

उपर्युक्त पंक्ति में Chaucer ने The Parson के बारे में the Prioress से भिन्न दिखाते हैं. The Prioress सन्यासिन होने के बावजूद भी भोगवादी है किन्तु The Parson पादरी है और उसी की भांति जीवन व्यतीत करता है. वह परोपकारी है पाखंडी नहीं.

चौसर अपने इस कृति के जरिये अंग्रेजी भाषा का पुरजोर ख्याति प्रदान किये. अंग्रेजी जो सामान्य लोगों की भाषा थी वो अब धीरे-धीरे सरकारी भाषा बनती चली गयी. Spenser उन्हें कहते हैं:-

‘The Well of English undefiled.’

The Canterbury Tales बहुत ही बेहतरीन imagery पेश करती है. चौसर अपनी इस कृति का प्रारंभ अप्रैल महीने के सुन्दर फिजाओं का जिक्र निम्न तरह से करते –

Whan that Aprill with his shoures soote
The droghte of March hath perced to the roote,
And bathed every veyne in swich licour
Of which vertu engendred is the flour;

इस तरह से हम देखते है कि चौसर अपनी Canterbury Tales में तत्कालीन सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक स्थितियों के बारे में स्पष्ट रूप से वर्णन किये हैं-

Highly Important Objective Questions:-

  1. How many pilgrims including Chaucer are there in ‘The Canterbury Tales’?
  2. How many pilgrims excluding Chaucer are there in ‘The Canterbury Tales’?
  3. In which month is the pilgrimage made?
  4. What is the name of the Host in ‘The Canterbury Tales’?
  5. When did Chaucer complete ‘The Canterbury Tales’?
  6. Who said, ‘The Well of English undefiled’?
  7. Who said, ‘Chaucer is the father of English Poetry’?
  8. How many tales are to be told by each pilgrim in ‘The Canterbury Tales’?
  9. Who was ‘St. Thomas-a-Becket?
  10. Which kind of poetry is ‘The Canterbury Tales’?