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Hindi Grammar हिंदी के प्रचलित रूप और इनकी विशेषताएं

बन्धु,
1000 ई के लगभग हिन्दी अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं की तरह अपने अस्तित्व में आ चुकी थी। इसकी मूल उत्पत्ति शौरसेनी अपभ्रश से मानी गई है। इसके अन्तर्गत निम्न रूप प्रचलित है-
पश्चिमी हिन्दी – ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुन्देली, खड़ी बोली, बाँगरू और राजस्थानी
पूर्वी हिन्दी – अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी, बिहारी
पहाड़ी प्रदेश की बोलियाँ – पश्चिमी, मध्य और नेपाली बोलियाँ
नोट-
हिन्दी में अनेक उपबोलियाँ के रहते हुए भी खड़ीबोली ही उसकी मूल भाषा बन गई। यह 200 वर्षो तक विकसित होती रही और इसका विस्तार होते गया।

हिन्दी की विशेषताएँ-

हिन्दी एक सशक्त और सरल भाषा है।
यह संस्कृत पर आधृत है।
इसने संस्कृत के वर्णमाला को अपनाया है।
इसने अधिकतर संस्कृत की ध्वनियों को अपनाया है।
इसकी लिपि देवनागरी है।
इसमें ध्वनि-प्रतीकों-स्वर और व्यंजन- का क्रम वैज्ञानिक है।
इसके स्वरों में ह्नस्व-दीर्घ के लिए अलग-अलग मात्राएँ है और स्वरों की मात्राएँ निश्चित है।
अल्पप्राण जैसे ’क’ और ’महाप्राण’ जैसे ’ख’के लिए अलग-अलग लिपि चिह्न है।
यह गतयात्मक और व्यवहारिक लिपि है।
एक ध्वनि के लिए एक ही चिन्ह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
यह जैसी लिखि जाती है वैसी ही लिखी जाती है।

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