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National Register of Citizens (NRC)-a Hindi Essay for SSC, Bank Exam

National Register of Citizens

दोस्तों एन आर सी का मुद्दा अभी काफी चर्चें में है। इसे ध्यान में रखते हुए निबंध का यह टाॅपिक काफी महत्व रखता है। आज का निबंध इसी पर आधारित है।
निबंध लिखने से पहले इस बात पर ध्यान रख लें कि इसके तहत कौन-कौन से बिन्दुओं की हमें व्याख्या करनी होगी।

1. एन आर सी का अर्थ क्या होता है। अर्थात इसका संक्षिप्त परिचय देना होगा।
2. इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
3. इसके पक्ष में कौन-कौन से बिन्दुएं है?
4. इसके विपक्ष में कौन-कौन से बिन्दुएं है?
5. फिर उपसंहार लिखकर निबंध को पूरा करना होगा।

संक्षिप्त परिचय-

एन आर सी का पूर्ण रुप नैशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजन्स है। इसे हिन्दी में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर कहते है। यह सबसे पहले 1951 के जनगणना में पहली बार प्रकाश में आया था। एन आर सी उन लोगों की रेजिस्टर या सूची-खाता है जिससे यह पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। यह अभी आसाम राज्य के लिए लागू है। गृह मंत्री श्री अमित शाह के अनुसार यह सारे देश में लागू कर दिया जाएगा। जिसका नाम इस एन आर सी सूची बही में शामिल नहीं है उसे अवैध नागरिक माना जाएगा। उसे देश से निकालने का काम होगा। इसके हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगो को भारतीय नागरिक माना गया था। सी ए बी अर्थात Citizenship Amendment Bill नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के अनुसार अब 2014 से पहले Asam में आये अल्पसंख्यकों को मुस्लिम अल्पसंख्यकों को छोड़कर उसकी पहचान के आधार पर नागरिकता देने की बात करती है।

एन आर सी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:-

19वीं और 20वीं शताब्दी के दरम्यान यांडाबो संधि- जो अंग्रेजो और म्यांमार के बीच 1826 में हुआ था के बाद अभी के बंगलादेश, म्यांमार और भारत के कई अन्य प्रांतों से लाखों लोगों का प्रवास असम में हुआ और ऐसे लोग वहीं पर बस गये। यह प्रवास लोगों का उस समय काफी बढ़ गया जब 26 मार्च 1971 को बंगलादेश पाकिस्तान से अलग हो गया। चूँकि बंगलादेश इस्लाम धर्म के आधार पर अलग हुआ था इसलिए लाखों की संख्या में हिन्दु प्रवासी भारत में शरण लिए और यहीं पर बस जाने का ठान लिए। इसके कारण आसाम के मूल निवासी को अपने ही राज्य में अपना अस्तित्व बचाये रखने का डर होने लगा। उनकी नौकरियों, उनकी मूल संस्कृति के खो जाने के डर ने आंदोलन का रुप ले लिया। इस आंदोलन का नारा था जोय आइ असम। असम के लोगो को यह डर सताने लगा है कि कहीं उनका हाल त्रिपुरा के जैसा ना हो जाय जहां के मूल निवासियों की संख्या केवल 33 प्रतिशत रह गई है। वहां बंगलादेश के लोग ही क्षेत्र को चला रहे है। अभी के नागरिकता संशोधन विधेयक नागरिकता प्राप्त करने का वर्ष 1971 से बढ़ाकर 2014 कर देने की बात कही गई है जो उनके अस्तित्व को बचाये रखने की चिंता और बढ़ा देती है।

पक्ष:-

भारत की सीमा से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंगलादेश जैसे तीन ऐसे देश जुड़े है जो इस्लामिक राष्ट्र कहलाते है। रिपोर्ट यह कहती है कि इन तीन देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों जैसे हिन्दु, बुद्ध, पारसी, क्रिश्चन पर काफी जुल्म ढाहे गये है जिसके कारण इनमें से कई अल्पसंख्यक उन देशों को छोड़कर भारत की नागरिकता प्राप्त करने की गुहार लगा चुके है। सरकार ऐसे को इस संशोधन विधेयक के जरिये नागरिकता देने का प्रावधान की है। वे हिन्दु बहुसंख्यक देश में अधिकार से रह सकेंगे।
इस विधेयक में जो अधिनियम का रुप ले लेगी में बाहर से आये सिर्फ मुस्लिमों को बाहर रखा गया है। उनपर यह आशंका की जाती है कि वे देश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो सकते है और साथ ही यह कहा जा रहा है कि वे अपने बगल के इस्लामिक देश बंगलादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान या कोई अन्य देश में शरण ले सकते है जहां पर उनकी संस्कृति, सोच के हिसाब से वातावरण मिलेगा।

विपक्ष-

भारत की संस्कृति में वसुधैव कुटम्बकम और अतिथि देवो भवो का भाव निहित है और इन्ही भाव के आधार पर हमारा संविधान को लिखा गया है। देश धर्मनिरपेक्ष है और इस आधार पर किसी विशेष धर्म को महत्व देना संविधान की मूल भावना पर आघात है। साथ ही साथ यह भी बात पर ध्यान देना है कि देश में अन्य देशों से भी कई शरणार्थी रह रहे है। वे भी इस आधार पर देश की नागरिकता प्राप्त करने के लिए देश पर दवाब डाल सकती है और यदि उन्हे भी बाद भी नागरिकता दे दी जाती है तब जैसा की हम सभी जानते है कि देश पहले से ही अति जनसंख्या, बेरोजगारी और भूखमरी का शिकार है। यह स्थिति देश में भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि दूसरे देशों से आए अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखकर ऐसा प्रावधान करना होगा जिससे देश की धर्मनिरपेक्षता और संस्कृति पर आंच ना आने पाये।